अच्छी खबर : कोलकाता बना PETA का सबसे अधिक वीगन-फ्रेंडली शहर- 2025, क्या है इसकी वजह?

कोलकाता को मिली यह उपाधि इस बात को साबित करती है कि यहां लोगों का झुकाव पेड़-पौधों पर आधारित खाद्य-पदार्थों की तरफ बढ़ रहा है।

By Moumita Bhattacharya

Nov 30, 2025 20:09 IST

PETA India ने आधिकारिक तौर पर कोलकाता को साल 2025 में देश का सबसे अधिक वीगन-फ्रेंडली शहर (Vegan-Friendly City) घोषित किया है। कोलकाता नगर पालिका (KMC) के मेयर फिरहाद हकीम को पेटा इंडिया की तरफ से यह सर्टिफिकेट सौंपा गया है।

कोलकाता को मिली यह उपाधि इस बात को साबित करती है कि यहां लोगों का झुकाव पेड़-पौधों पर आधारित खाद्य-पदार्थों की तरफ बढ़ रहा है। इस बारे में पेटा इंडिया का दावा है कि कोलकाता की पारंपरिक खाद्य शैली और बंगाली खान-पान (Cuisine) वीगन लोगों के लिए दूसरे किसी भी शहर के मुकाबले अधिक उपयुक्त है।

वीगन खाद्य शैली क्या है?

वीगन एक कठोर खाद्य शैली है। वीगन खाने वाला व्यक्ति शाकाहारी तो होता ही है लेकिन वह कठोरता के साथ सिर्फ मांस-मछली-अंडा ही नहीं बल्कि पशुओं से मिलने वाले दूसरे उत्पाद जैसे शहद, घी, मक्खन, दूध आदि का सेवन भी नहीं करता है।

इसके अलावा वे पशुओं से मिलने वाले दूसरे उत्पाद जैसे चमड़ा, ऊन, सिल्क आदि का इस्तेमाल भी नहीं करते हैं और न ही किसी भी ऐसे उत्पाद का उपयोग करते हैं जिनका परीक्षण पशुओं पर किया गया हो। इस वजह से वीगन व्यक्तियों के पास भोजन के काफी विकल्प ही उपलब्ध होते हैं। वीगन व्यक्ति सिर्फ और सिर्फ पौधों से मिलने वाले उत्पादों पर ही गुजारा करता है।

कौन सी वजहें बनाती हैं कोलकात को एक वीगन फ्रेंडली शहर?

आसानी से अपनाया जा सकता है वीगन डाएट : बंगाली खाद्य शैली इस तरह की मानी जा रही है, जिसमें वीगन डाएट को आसानी से अपनाया जा सकता है। पेड़-पौधों से मिलने वाले खाद्य-पदार्थों के साथ ही पारंपरिक बंगाली खान-पान में दुग्ध, घी, डेयरी उत्पाद अथवा पशुओं से मिलने वाले उत्पादों को हटाकर कोई भी वीगन व्यक्ति अपना डाएट आसानी से मेंटेन कर सकता है।

पारंपरिक भोजन : कई पारंपरिक बंगाली भोजन जैसे आलू पोस्तो, आलू का चॉप, चना दाल, खजूर-टमाटर की चटनी, फुचका आदि यहां के लोगों के प्रतिदिन के डाएट में शामिल जरूर होता है लेकिन इनमें पशुओं से प्राप्त किसी भी तरह के उत्पादों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इस वजह से यह भोजन पूरी तरह से वीगन फ्रेंडली होता है।

वीगन व पौधों पर आधारित भोजन की ओर बढ़ता झुकाव : सिर्फ पारंपरिक भोजन या खाद्य शैली ही नहीं बल्कि कोलकाता में बड़ी संख्या में ऐसे रेस्तरां और कैफे भी खुल रहे हैं जहां वीगन भोजन की विस्तृत रेंज उपलब्ध होती है। यहां स्वाद और पौष्टिकता से बिना कोई समझौता किए स्टीर फ्राएड आइटम्स, टोफू, वीगन डेजर्ट, नकली मांस से बने डिश और डेयरी उत्पादों के कई विकल्प उपलब्ध होते हैं।

लोगों में बढ़ती जागरूकता : वीगन खाद्य शैली के प्रति कोलकाता में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ती जा रही है। आज कोलकाता में बड़ी संख्या में लोग न सिर्फ वीगन खाद्य शैली को अपना रहे हैं बल्कि वीगन समूह, जानवरों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले लोगों के समूह की संख्या भी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। लोगों का यहां पशुओं से मिलने वाले खाद्य उत्पादों के मुकाबले पौधों से मिलने वाले भोजन के प्रति झुकाव बढ़ रहा है।

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