अब तक 18 लाख मृत मतदाताओं की खोज मिली, आगे और हैं 'फर्जी-स्थानांतरित-ग़ायब' मतदाता

By शुभजीत चक्रवर्ती, Posted by: लखन भारती

Nov 29, 2025 23:01 IST

9 दिसम्बर को एक सूची भी जारी की जाएगी, जिसमें मृत, फर्जी, स्थानांतरित और ग़ायब मतदाताओं की सूची प्रकाशित की जाएगी।

वोटर सूची जारी करने के दिन जैसे-जैसे नज़दीक आ रहा है, विभिन्न सवाल उठ रहे हैं। मैपिंग में असंगत मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। शुक्रवार को यह संख्या करीब 28 लाख थी और 24 घंटे में यह बढ़कर 35 लाख हो गई। चुनाव आयोग सूत्रों के अनुसार 29 नवंबर दोपहर 3 बजे तक राज्य में डिजिटाइज्ड एन्यूमरेशन फॉर्म की संख्या 6 करोड़ 88 लाख थी। अर्थात 88.50 प्रतिशत डिजिटाइजेशन का काम पूरा हो चुका है और उसके बाद ही उस जानकारी के आधार पर यह संख्या सामने आई है।

29 नवंबर, शाम 6 बजे तक प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार (स्रोत: आयोग)

मृत: 18,70,000

भ्रामक: 77,565

स्थानांतरित: 11,82,000

गायब: 3,80,000

मैपिंग कैसे हो रही है ?

राज्य के वर्तमान मतदाता सूची के साथ 2002 और उसके बाद देशभर में जहां-जहां SIR हुआ था, उन स्थानों की सूची मिलाकर देखना ही मैपिंग है। मैपिंग के मामले में यह भी देखा जाता है कि किसी मतदाता के पिता या माता का नाम अंतिम SIR सूची में है या नहीं। अगर जुड़ाव पाया जाता है तो उन्हें आसानी से पहचाना जा रहा है। उनके 2026 की सूची में नाम होने में भी कोई समस्या नहीं होगी।

हालांकि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अभी डिजिटलाइजेशन का काम चल रहा है। इसलिए इस मैपिंग में विसंगतियों की संख्या बढ़ भी सकती है और घट भी सकती है। राज्य के CEO कार्यालय ने आम लोगों के संदेह को दूर करने के लिए कई बार बताया है कि मैपिंग में पता न चलने का मतलब यह नहीं है कि अंतिम मतदाता सूची से नाम हटा दिया जाएगा।

आयोग ने बताया है कि जिन लोगों की जानकारी प्राप्त हो चुकी है उनके मामले में अलग से किसी दस्तावेज़ की जरूरत नहीं होगी। हालांकि जिन लोगों के नाम या कोई पूर्व स्रोत नहीं मिल पाता है, उनके मामलों में आयोग विभिन्न दस्तावेज़ों की जाँच करेगा। आगामी 9 दिसंबर को मतदाता की प्रारूप सूची प्रकाशित होने वाली है।

यही दिन एक सूची भी प्रकाशित की जाएगी, जिसमें मृत, नकली, स्थानांतरित और अनुपस्थित मतदाताओं की सूची होगी। इसके बाद ही ERO सुनवाई के लिए बुलाएंगे और उसके बाद ही जानकारी की जाँच का चरण शुरू होगा। हालांकि जिस दर से मैपिंग न होने वाले मतदाताओं की संख्या बढ़ रही है, उस स्थिति में यह संख्या कहाँ तक पहुँचती है, अब वही देखने की बात है।

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