रिटर्न में विदेशी संपत्तियों की सूचना नहीं दी, अब आयकर विभाग भेजेगा मेल-SMS

आयकर विभाग ने कई रिटर्न को ‘हाई-रिस्क’ या उच्च जोखिम वाली श्रेणी में चिह्नित किया है।

By सुदीप्त बनर्जी, Posted by: श्वेता सिंह

Nov 28, 2025 14:57 IST

आयकर विभाग के ध्यान में आया है कि 2025–26 असेसमेंट वर्ष के लिए जमा किए गए आयकर रिटर्न (ITR) में कई करदाताओं ने विदेश में मौजूद वित्तीय संपत्तियों की जानकारी नहीं दी है। इनमें से कई रिटर्न को ‘हाई-रिस्क’ यानी उच्च जोखिम वाला चिह्नित किया गया है, ऐसा गुरुवार को आयकर विभाग ने बताया।

इन सभी करदाताओं को सतर्क करने के लिए आयकर विभाग आज 28 नवंबर से उनके मोबाइल पर SMS और ईमेल भेजना शुरू करेगा। संदेश में उन्हें 2025 के 31 दिसंबर के भीतर संशोधित आयकर रिटर्न जमा करने की सलाह दी जाएगी ताकि भविष्य में जुर्माना और कानूनी जटिलताओं से बचा जा सके। करदाताओं को स्वेच्छा से त्रुटि सुधारने का एक अवसर देने और पारदर्शिता के साथ विदेशी संपत्तियों की जानकारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ही विभाग की ओर से यह पहल की गई है।

आयकर विभाग द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि 2024–25 वित्त वर्ष तथा 2024 कैलेंडर वर्ष की जानकारी का विश्लेषण करने पर पाया गया कि कई मामलों में विदेश में वित्तीय संपत्तियों का अस्तित्व होने के बावजूद उन्हें 2025–26 असेसमेंट वर्ष के रिटर्न में उल्लेख नहीं किया गया। ऐसे मामलों को ही ‘हाई-रिस्क’ के रूप में चिह्नित किया गया है।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड या CBDT नियमित रूप से विभिन्न देशों से भारतीय निवासियों के वित्तीय लेनदेन की जानकारी पाता है। कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड्स (CRS) के तहत विभिन्न सहयोगी देशों से और अमेरिका के मामले में फॉरेन अकाउंट टैक्स कंप्लायंस एक्ट (FATCA) के माध्यम से यह सूचना आदान–प्रदान होता है। इसी प्रक्रिया से आयकर विभाग को करदाताओं के विदेशी बैंक खाते, निवेश और अन्य वित्तीय संपत्तियों के बारे में जानकारी मिलती है और वह उन्हें करदाताओं के रिटर्न से मिलाकर संभावित विसंगतियों की पहचान करता है।

पिछले वर्ष भी इसी प्रकार करदाताओं को विदेशी संपत्तियों की जानकारी देने की याद दिलाने की पहल की गई थी। तब 2024–25 असेसमेंट वर्ष के लिए कुछ चुनिंदा करदाताओं को SMS और ईमेल भेजे गए थे। उन सभी करदाताओं की विदेशी संपत्तियों की जानकारी आयकर विभाग को विदेशी प्राधिकारियों से मिली थी, जबकि संबंधित करदाता ने रिटर्न में उनका उल्लेख नहीं किया था।

उस पहल का परिणाम आयकर विभाग को तुरंत मिला। 24,678 करदाताओं ने अपने रिटर्न की दोबारा समीक्षा कर उन्हें संशोधित किया और कुल 29,208 करोड़ रुपये की विदेशी संपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक की। साथ ही उन्होंने विदेश से प्राप्त 1,089.88 करोड़ रुपये की आय भी घोषित की। उल्लेखनीय है कि इस सूची में ऐसे कई करदाता भी थे जिन्हें सीधे SMS या ईमेल नहीं भेजा गया था, लेकिन जागरूकता अभियान के कारण उन्होंने आगे आकर संशोधित रिटर्न जमा किया।

इस बार अभियान का मुख्य लक्ष्य ITR के ‘शेड्यूल फॉरेन असेट्स’ और ‘फॉरेन सोर्स इनकम’ से संबंधित हिस्सों में सही जानकारी सुनिश्चित करना है। 1961 के आयकर अधिनियम और ब्लैक मनी (अनडिस्क्लोज़्ड फॉरेन इनकम एंड असेट्स) तथा 2015 के इम्पोज़िशन ऑफ टैक्स अधिनियम के अनुसार विदेश में मौजूद संपत्तियों और आय की पूरी तथा सटीक जानकारी देना प्रत्येक करदाता के लिए कानूनी रूप से अनिवार्य है।

निर्धारित समय के भीतर संशोधित रिटर्न जमा न करने पर करदाताओं पर कड़े वित्तीय दंड, अतिरिक्त कर और आवश्यकता पड़ने पर आपराधिक मुकदमे का जोखिम भी उत्पन्न हो सकता है। आयकर विभाग को आशा है कि यह अग्रिम चेतावनी और दिया गया अवसर अधिक संख्या में करदाताओं को स्वेच्छा से आगे आकर विदेशी संपत्तियों का सही विवरण प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित करेगा। जिससे कर-प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वास का माहौल और ज़्यादा मजबूत होगा।

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