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ईद मिलन मुशायरा में इश्क़, दर्द और सामाजिक सरोकारों पर आधारित बेहतरीन शायरी से सजी यादगार शाम

कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज के इस कार्यक्रम की सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताते हुए सराहना

By डॉ. अभिज्ञात

Apr 11, 2026 14:32 IST

कोलकाताः कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज में आयोजित ईद मिलन मुशायरा ने उर्दू अदब की समृद्ध परंपरा और उसकी जीवंतता को उजागर किया। इश्क़, दर्द और सामाजिक सरोकारों पर आधारित बेहतरीन शायरी से सजी इस यादगार महफिल ने श्रोताओं के दिलों को गहराई से छुआ। कार्यक्रम में शहर की प्रतिष्ठित साहित्यिक और शैक्षणिक हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति ने इसे और भी खास बना दिया।

उर्दू विभाग और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस भव्य मुशायरे की अध्यक्षता प्रोफेसर ज़रीना ज़र्रीं ने की, जबकि कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. सत्या उपाध्याय ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने ऐसे आयोजनों को सामाजिक सौहार्द, सांस्कृतिक एकता और साहित्यिक परंपराओं के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए इसकी सराहना की।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर मौयत्री भट्टाचार्य (गवर्निंग बॉडी सदस्य, कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज) और डॉ. प्रेम कुमार घोष (कोऑर्डिनेटर, IQAC) उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने उर्दू साहित्य की समृद्ध परंपरा और उसके संरक्षण पर जोर दिया।

कार्यक्रम का संचालन उर्दू विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नईम अनीस ने प्रभावशाली अंदाज़ में किया, जिससे पूरे आयोजन में एक सुव्यवस्थित और साहित्यिक वातावरण बना रहा।

मुशायरे में कई प्रसिद्ध शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, इनमें फिरोज़ अख्तर, मुर्शिद आलम मुर्शिद, रौनक अफरोज़, इरशाद मज़हरी, इरशाद आरज़ू, नसीम फ़ाइक, ज़ीशान मिर्ज़ा, नजफ़ मुर्शिदाबादी, डॉ. अहमद मेराज, शहनाज़ रहमत, फ़रज़ाना परवीन, बुशरा सहर, दानिश हुसैन दानिश, शकील रेशरावी और इक़बाल आदिल शामिल रहे।

इसके अलावा महानगर की कई प्रतिष्ठित साहित्यिक हस्तियों ने कार्यक्रम में शिरकत की, जिनमें पश्चिम बंगाल उर्दू अकादमी की गवर्निंग बॉडी के सदस्य डॉ. नौशाद आलम, द मुस्लिम इंस्टीट्यूट के साहित्य सचिव डॉ. जावेद अख्तर, बज़्म-ए-अदब के प्रमुख अख्तर हुसैन शामिल हैं।

मुशायरे में पढ़ी गयी ग़जलों से कुछ यादगार शेर यूं हैं-

मेरे हिस्से में तो दो गज़ ही ज़मीन आई है

आस्माँ! मैं तुझे हुजरे में नहीं रख सकता।

-इरशाद आरज़ू


नखरे दिखाओ, बात करो या रहो ख़ामोश

तुम इश्क़ हो और इश्क़ को हैं सारे इख़्तियार।

- दानिश हुसैन दानिश


न ज़हर देगा न गर्दन मेरी उतारेगा

है एक वादा मुझे प्यास दे के मारेगा।

-रौनक अफ़रोज़


आप आलिम, आप आक़िल, आप दानिशमंद हैं

आप अश्कों से लिखी तहरीर पढ़ पाएँगे क्या।

-फ़रज़ाना परवीन


इश्क़ को चाहिए नज़र ऐसी

हुस्न चिलमन से भी दिखाई दे

-अहमद मेराज


जहाँ टूटे हुए दिल जोड़े जाएँ

एक ऐसा कारख़ाना चाहिए था।

-ज़ीशान मिर्ज़ा


रात भर चाँद ने आँगन में उजाला रखा

जैसे उम्मीद ने हर दिल में सहारा रखा।

-मोहम्मद इक़बाल आदिल


मुझे तो मौत ने आकर जगा दिया मुर्शिंद

वगरना हर कोई मसरूफ़ अपने ख़्वाब में है

-मुर्शिद आलम मुर्शिद


पहले रस्ता मरता है फिर उम्मीदें

और फिर एक दिन मर जाते हैं हम दोनों।

-इरशाद मज़हरी


रक़्स जारी है तजल्ली का जहाँ

हाँ वो महफ़िल तो मेरा दिल ठहरा

-ज़रीना ज़र्रीं


अनगिनत शागिर्द के उस्ताद हो जाओ तो क्या

तुम नहीं उस्ताद हो सकते मगर उस्ताद के।

-नजफ़ मुर्शिदाबादी


कुछ ऐसे हादिसे भी ज़िंदगी में पेश आते

इंसान बच तो जाता है पर ज़िंदा नहीं रहता

- बशरा सहर

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