नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने इस वित्त वर्ष में फ्रेशर्स की भर्ती को धीमा करने का फैसला किया है। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष के लिए लगभग 25 हजार फ्रेशर्स को नौकरी के ऑफर दिए हैं जो पिछले साल के मुकाबले काफी कम है।
पिछले वित्त वर्ष में TCS ने करीब 44 हजार फ्रेशर्स को नौकरी दी थी। इससे पहले भी कई वर्षों तक कंपनी हर साल 40 हजार से ज्यादा फ्रेशर्स को नियुक्त कर रही थी। ऐसे में इस बार भर्ती संख्या में आई गिरावट ने नौकरी बाजार में चिंता बढ़ा दी है खासकर आईटी के छात्रों के बीच।
कंपनी के सीईओ और प्रबंध निदेशक के. कृतिवासन ने कहा कि इस साल 25 हजार फ्रेशर्स को ऑफर दिए गए हैं। आगे भर्ती बढ़ेगी या नहीं यह बाजार में आईटी सेवाओं की मांग पर निर्भर करेगा। यानी कंपनी ने भर्ती पूरी तरह बंद नहीं की है और भविष्य में मांग बढ़ने पर नियुक्तियां बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर आईटी सेक्टर में चल रही छंटनी इसका बड़ा कारण है। कई बड़ी कंपनियां जैसे मेटा और ओरेकल ने हाल के समय में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की संख्या घटाई है। लागत कम करने की इस प्रवृत्ति का असर भारतीय कंपनियों पर भी पड़ा है और TCS भी उसी दिशा में सावधानी से कदम बढ़ा रही है।
हालांकि पिछले साल भी बाजार में अनिश्चितता थी फिर भी TCS ने बड़े पैमाने पर फ्रेशर्स की भर्ती की थी। इसलिए इस बार संख्या में कमी को बड़ा झटका माना जा रहा है।
यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कंपनी अब अनुभवी कर्मचारियों यानी लैटरल हायरिंग पर ज्यादा ध्यान दे रही है। इस पर सीईओ ने साफ कहा कि कंपनी का मुख्य कामकाज अभी भी फ्रेशर्स पर आधारित है। उन्हें प्रशिक्षण देकर काम में लगाना ही कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति है।
उन्होंने यह भी बताया कि फ्रेशर्स को पूरी तरह काम में ढलने में करीब 9 महीने का समय लगता है, जबकि अनुभवी कर्मचारी जल्दी प्रोजेक्ट में शामिल हो जाते हैं। इसके बावजूद कंपनी की प्राथमिकता फ्रेशर्स ही बने हुए हैं।
कुल मिलाकर TCS का यह फैसला मौजूदा आईटी बाजार में सतर्कता और अनिश्चितता को दर्शाता है जिससे नए नौकरी चाहने वालों की चिंता बढ़ गई है।