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बच्चों की ढाल बनी आंगनवाड़ी कर्मी, 20 मासूमों को बचाकर मधुमक्खियों के डंक से शहीद

वह अपने परिवार की एकमात्र सहारा थीं। स्थानीय लोगों ने उनके परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

By कौशिक दत्त, Posted by: प्रियंका कानू

Feb 04, 2026 11:25 IST

भोपाल: झुंड के झुंड मधुमक्खियां हमला करने लगीं। जब मधुमक्खियों के झुंड ने हमला किया, उस समय बच्चे बैठकर पढ़ाई कर रहे थे। यह देखते ही बिना एक पल गंवाए बच्चों को बचाने के लिए एक आंगनवाड़ी कर्मी आगे बढ़ गईं। उन्होंने कम से कम 20 बच्चों को उस हमले से बचा लिया लेकिन खुद को नहीं बचा सकी। मधुमक्खियों के डंक से उनकी मौत हो गई। यह घटना मध्य प्रदेश के नीमच जिले के रनपुर गांव की है। बच्चों की जान बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाली आंगनवाड़ी कर्मी का नाम कंचनबाई मेघवाल था। वह जय माता दी नामक एक स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष थीं। वह उस आंगनवाड़ी केंद्र में रसोइया के रूप में काम करती थीं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सोमवार दोपहर यह घटना मडावाड़ा पंचायत के एक आंगनवाड़ी केंद्र में हुई। उस केंद्र के परिसर में बच्चे खेल रहे थे। केंद्र के पास ही एक पेड़ पर मधुमक्खियों का छत्ता था। अचानक वहीं से मधुमक्खियों का झुंड नीचे आ गया। एक साथ इतनी मधुमक्खियों को आते देख कंचनबाई मेघवाल ने एक पल भी देर नहीं की। उन्होंने अपनी परवाह किए बिना बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। आसपास पड़ी तिरपाल और चटाइयों से एक-एक कर बच्चों को लपेटकर अपने शरीर से ढकते हुए तेजी से उन्हें केंद्र के अंदर पहुंचाया। जब वह बच्चों को अंदर ले जा रही थीं, तभी मधुमक्खियों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। इसके बावजूद वह बच्चों की जान बचाने में जुटी रहीं।

बाद में गांव के लोगों ने उन्हें गंभीर हालत में स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। उनके साथ कालूनाथ और पायलट राजेश राठौर नाम के दो पुलिसकर्मी भी थे। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार, कंचनबाई के पति शिवलाल पक्षाघात से पीड़ित हैं। उनके परिवार में एक बेटा और दो बेटियां हैं। गांव वालों ने बताया कि कंचनबाई ही पूरे परिवार की एकमात्र सहारा थीं।

मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद उनका शव रनपुर गांव लाया गया। गांव के लोगों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। जिस साहस के साथ उन्होंने दूसरों की जान बचाते हुए अपने प्राण त्यागे, उसके लिए लोगों ने उन्हें नमन किया। हालांकि अब गांव के लोग उस आंगनवाड़ी केंद्र में जाने से डर रहे हैं। वे अपने बच्चों को वहां भेजने का साहस नहीं कर पा रहे हैं। आंगनवाड़ी केंद्र के पास के पेड़ पर ही मधुमक्खियों का छत्ता है और वहीं पानी का नल भी है। ऐसे में पानी लेने में भी लोग डर महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों ने तुरंत उस छत्ते को हटाने और कंचनबाई के परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। दूसरी ओर, मंगलवार को अमलिखेड़ा गांव के मुख्य चौराहे पर भी मधुमक्खियों के एक झुंड ने लोगों पर हमला कर दिया, जिसमें कई ग्रामीण घायल हो गए। इससे इलाके में दहशत और बढ़ गई है।

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