दुबई: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान सरकार टीम पर दबाव डालकर अगले हफ्ते कोलंबो में भारत के खिलाफ होने वाले टी20 विश्व कप मैच का बहिष्कार करवाती है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। संभावित भारी आर्थिक नुकसान, होस्ट ब्रॉडकास्टर की ओर से कानूनी कार्रवाई और यहां तक कि आधिकारिक बहिष्कार की स्थिति में पाकिस्तान को पूरे टूर्नामेंट से निलंबित भी किया जा सकता है।
हालांकि आईसीसी टूर्नामेंट में यह पहली बार नहीं होगा जब किसी टीम ने चुनिंदा मुकाबलों में हिस्सा नहीं लिया हो। 1996 विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज ने सरकारी निर्देशों के चलते श्रीलंका के खिलाफ अपने मैचों का बहिष्कार किया था। 2003 विश्व कप में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड ने जिम्बाब्वे और केन्या के खिलाफ खेलने से इनकार किया था। वहीं 2009 टी20 विश्व कप में राजनीतिक तनाव के कारण जिम्बाब्वे ने इंग्लैंड के खिलाफ मैच से हटने का फैसला किया था। इन सभी मामलों में आईसीसी ने किसी तरह की सजा नहीं दी थी और पाकिस्तान इस बात से भली-भांति परिचित है। डॉन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड अब 2018 में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के खिलाफ दायर मामले का हवाला देकर आईसीसी के खिलाफ कानूनी चुनौती की तैयारी कर रहा है।
उस मामले की शुरुआत तब हुई थी, जब भारत 2014 में हुए समझौते के तहत 2015 से 2023 के बीच दोनों देशों के बीच छह द्विपक्षीय सीरीज आयोजित करने में विफल रहा। इसके बावजूद, पीसीबी ने आईसीसी के बिग थ्री रेवेन्यू मॉडल का समर्थन किया था, जिसके तहत भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड आईसीसी की कुल आय के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं। 2018 की सुनवाई के दौरान एक सूत्र के मुताबिक, पीसीबी ने बीसीसीआई से पाकिस्तान दौरा न करने के कारण स्पष्ट करने को कहा था। शुरुआत में बीसीसीआई ने कहा था कि वह किसी भी तरह का कारण बताने के लिए बाध्य नहीं है लेकिन बाद में यह तर्क दिया गया कि भारत सरकार ने दौरे की अनुमति नहीं दी थी।
इसके बावजूद, सूत्रों ने यह भी चेतावनी दी है कि आईसीसी में बीसीसीआई का प्रभाव एक बार फिर पाकिस्तान के खिलाफ फैसलों को प्रभावित कर सकता है और सजा की संभावना बनी रह सकती है। ऐसे में पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय खेल पंचाट यानी कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए भी तैयार है। पाकिस्तान के मौजूदा बहिष्कार के फैसले की जड़ आईसीसी और बांग्लादेश के बीच चल रहा विवाद है। बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपने विश्व कप मैच भारत से बाहर कराने की मांग की थी लेकिन आईसीसी और भारत दोनों ही अपने रुख पर अड़े रहे। इसके बाद आईसीसी ने बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया और उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया। इस फैसले के बाद पाकिस्तान में तीखी प्रतिक्रिया और असंतोष देखने को मिला।