नई दिल्ली: सोमवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र से पहले विपक्षी सांसदों ने तय किया है कि वे SIR , आय और समानता,दिल्ली ब्लास्ट, प्रदूषण और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों को सत्र में प्रमुखता से उठाएँगे। इंडिया ब्लॉक के नेता सोमवार को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मलिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में बैठक करने जा रहे हैं। कांग्रेस दोनों सदनों में विपक्ष का नेतृत्व कर रही है।कांग्रेस भारत-पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर और चीन के साथ व्यापार समझौतों के मुद्दों पर चर्चा की मांग करेगी।
कई विपक्षी सांसदों ने ANI से बात करते हुए बताया कि उनकी पार्टियाँ किन मुद्दों को संसद के सामने रखना चाहती हैं।राजद नेता मनोज कुमार ने कहा कि जनता के मुद्दे गायब हो जाते हैं। ज्यादातर राजनीतिक बहसें काल्पनिक हो गई हैं। चुनावों में भी यही होता है। जनता के असली मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। इसकी मुख्य वजह मुख्यधारा की मीडिया है। सरकार को चुनावों से आगे सोचने की ज़रूरत है। आय और समानता क्या चर्चा के मुद्दे नहीं हैं? GDP की कहानी सुनाई जाती है लेकिन लोगों की ज़िंदगी में उसका असर नहीं दिखता। क्या इस पर चर्चा नहीं होनी चाहिए? उन्होंने कहा कि अगर हमने SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख नहीं किया होता तो लोगों को दस्तावेज़ में जो राहत मिली, वह भी नहीं मिलती। इन मुद्दों पर संसद में गहन चर्चा होनी चाहिए, वरना संसद एक म्यूज़ियम बनकर रह जाएगी।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि पूरे राज्य में बहुत कम समय में SIR करवाया गया, जो असंभव था। दिल्ली में ब्लास्ट हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पूरी तरह भटक गई है। दिल्ली और कई राज्यों में वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। इन सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। इस पर कांग्रेस सरकार को घेरेगी। कांग्रेस नेता तनुज पुनिया ने कहा कि हम सार्वजनिक हित के मुद्दे उठाते हैं। SIR प्रक्रिया में फर्जी मतदाता जोड़े जा रहे हैं और असली मतदाताओं को हटाया जा रहा है। यह हमारी सबसे बड़ी चिंता है। SIR ही हमारा मुख्य मुद्दा होगा। शिवसेना (UBT) की प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि सत्ता पक्ष का एजेंडा होता है, लेकिन विपक्ष के मुद्दे भी हैं। SIR के दौरान कई BLO दबाव में काम कर रहे हैं और कई की जान चली गई। यह प्रक्रिया अमानवीय और असंवेदनशील हो गई है। मुंबई में आदित्य ठाकरे के वोट चोरी के आरोप, राहुल गांधी द्वारा कर्नाटक और हरियाणा को लेकर उठाए गए मुद्दे, एजेंसियों के दुरुपयोग और प्रदूषण व मिलावटी खाद्य पदार्थ जैसे मुद्दे भी उठेंगे।
CPI सांसद पी. संदोश कुमार ने कहा कि हम अपनी राय रखेंगे, लेकिन सरकार कुछ मानेगी, इसकी उम्मीद कम है। वे बिलों की सूची तैयार कर चुके होंगे और नए एजेंडे भी ले आएंगे। पिछली बार भी उन्होंने अंतिम दिनों में अचानक संवैधानिक संशोधन बिल पेश किया था। CPI की ओर से वे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर चर्चा की माँग करेंगे। चुनाव आयोग राजनीतिक दलों के सुझावों को नज़रअंदाज़ करता है,। खासकर विपक्ष के।
संसद का यह सत्र 19 दिनों में कुल 15 बैठकें करेगा। निजी सदस्य विधेयक 5 और 19 दिसंबर को, जबकि निजी सदस्य प्रस्ताव 12 दिसंबर को लिए जाएँगे।