नयी दिल्लीः नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित कुल आठ लोगों के खिलाफ नया एफआईआर दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा भेजी गई औपचारिक शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने रविवार को की है। इसी मामले से जुड़ी पहले की प्रक्रिया में दिल्ली पुलिस ने 3 अक्टूबर को एक अन्य एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें कांग्रेस नेता सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, कंपनी यंग इंडियन, डोटेक्स मर्चेंडाइज, उसके प्रमोटर सुनील भंडारी और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के नाम शामिल थे।
एफआईआर में लगाए गए आरोपः पुलिस ने एफआईआर में IPC की जिन धाराओं को शामिल किया है, वे हैं-120 बी-आपराधिक साज़िश, 403-संपत्ति का बेईमानी से दुरुपयोग और 406-आपराधिक विश्वासघात, 420-धोखाधड़ी। यह सभी आरोप उसी शिकायत से जुड़े हैं, जिसमें ईडी ने दावा किया है कि एजेएल की 2,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा मूल्य की संपत्तियों का गलत तरीके से अधिग्रहण किया गया। एजेएल नेशनल हेराल्ड समाचार प्लेटफ़ॉर्म अर्थात अख़बार और वेब पोर्टल का प्रकाशन करती थी।
ED के आरोप और जांच की दिशाः ईडी का कहना है कि उसकी जांच में यह सामने आया कि यंग इंडियन कंपनी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास 38-38 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी ने एजेएल की करोड़ों की संपत्तियाँ मात्र 50 लाख रुपये में अपने नियंत्रण में ले लीं। ईडी का आरोप है कि यह सौदा वास्तविक बाज़ार मूल्य से बेहद कम था। एजेंसी यह भी कहती है कि कांग्रेस के पहले परिवार वाले नेताओं ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके एजेएल से जुड़ी संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल किया। ईडी के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया एक संगठित आपराधिक साज़िश का हिस्सा थी।
न्यायालय की कार्यवाही और अगला कदमः दिल्ली की राउज़ एवेन्यू अदालत ईडी की चार्जशीट पर 16 दिसम्बर को यह निर्णय देगी कि उसे औपचारिक रूप से स्वीकार किया जाए या नहीं। अदालत ने इससे पहले सभी अभियुक्तों को नोटिस भेजकर कहा था कि पहले उनका पक्ष सुना जाना आवश्यक है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने टिप्पणी की कि नया आपराधिक प्रक्रिया कानून अभियुक्तों को प्रारंभिक स्तर पर अपना पक्ष रखने का विशेष अधिकार देता है, जिससे सुनवाई पारदर्शी बनी रहती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मनी लॉन्ड्रिंग केस और मूल अपराध दोनों की सुनवाई एक ही अदालत में होगी, जैसा कि PMLA में प्रावधान है।
मामले की पृष्ठभूमिः नेशनल हेराल्ड विवाद की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई। उस समय पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने अदालत में शिकायत दर्ज करायी थी कि कांग्रेस नेताओं ने पार्टी फंड का दुरुपयोग कर एजेएल से जुड़ी संपत्तियों को अनुचित तरीके से अपने नियंत्रण में लिया। कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए इसे छोटी मानसिकता वाली राजनीति और ईडी को सत्ता पक्ष का सहयोगी करार दिया है।