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देश के आईटी शेयरों में लगातार गिरावट, TCS, Wipro और Infosys पर बढ़ा दबाव

गुरुवार को भी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में यही रुझान देखा गया था।

By अंशुमान गोस्वामी, posted by : राखी मल्लिक

Feb 13, 2026 17:05 IST

मुबंई : सप्ताह के आखिरी ट्रेडिंग सत्र में देश के शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी50 के साथ-साथ देश की आईटी कंपनियों के शेयरों में भी बड़ी गिरावट देखी गई। गुरुवार को भी आईटी कंपनियों के शेयरों में यही रुझान देखने को मिला था। अंतिम ट्रेडिंग सत्र में अमेरिका के शेयर बाजार में दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट आई थी। उसका असर घरेलू आईटी कंपनियों के शेयरों पर भी पड़ा है।

शुक्रवार के ट्रेडिंग सत्र में निफ्टी आईटी सेक्टोरल इंडेक्स में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। इसकी वजह यह इंडेक्स 31,422 अंक पर आ गया, जो अक्टूबर 2023 के बाद का सबसे निचला स्तर है। शुक्रवार सहित पिछले तीन दिनों में इस सूचकांक में 12 प्रतिशत अंकों की गिरावट दर्ज की गई है।

देश के आईटी शेयरों में इन्फोसिस के शेयर सबसे ज्यादा (7.5 प्रतिशत) गिरे। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयर 6 प्रतिशत गिरे, एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयर 5.5 प्रतिशत नीचे आए और टेक महिंद्रा तथा विप्रो के शेयर लगभग 4.5 प्रतिशत तक गिर गए।

आईटी शेयरों में गिरावट क्यों?

पिछले सप्ताह Anthropic ने अपना एआई प्लेटफॉर्म ‘क्लॉड’ बाजार में उतारा। इसके बाद से ही आईटी शेयरों में बिकवाली बढ़ी। बाजार का मानना है कि एआई की तेज प्रगति भारतीय आईटी सर्विसेज क्षेत्र के कारोबार के स्वरूप को बदल सकती है। एआई प्लेटफॉर्म ‘क्लॉड’ लॉन्च होने के बाद से आईटी शेयरों पर बिक्री का दबाव बढ़ा है। बाजार की मुख्य आशंका यह है कि जेनरेटिव एआई तेजी से काम का समय घटा रहा है और कई रूटीन कार्यों को ऑटोमेट कर रहा है। इससे पारंपरिक ‘हेडकाउंट-आधारित’ आउटसोर्सिंग मॉडल पर संरचनात्मक दबाव बन रहा है।

विश्लेषकों के अनुसार समान आउटपुट देने के लिए पहले की तुलना में कम कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी। खासकर रूटीन कार्यों में छंटनी का जोखिम बढ़ सकता है। आने वाली कुछ तिमाहियों में एआई अपनाने की गति डील-विन पर भी असर डाल सकती है। इससे टॉपलाइन वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका है। इसलिए डील फ्लो पर करीबी नजर रखना जरूरी है, ऐसा बाजार विशेषज्ञों का मत है।

5 फरवरी को जारी एक नोट में ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने कहा है कि जेनरेटिव एआई का बढ़ता उपयोग आईटी सेक्टर के राजस्व को लगभग 12 प्रतिशत तक कम कर सकता है। फर्म के अनुसार यह प्रभाव 3 से 4 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से दिखाई दे सकता है। इससे हर वर्ष राजस्व वृद्धि पर औसतन लगभग 2 प्रतिशत का दबाव बढ़ सकता है।

(समाचार एई समय कहीं भी निवेश की सलाह नहीं देता। शेयर बाजार या किसी भी क्षेत्र में निवेश जोखिम के अधीन है। निवेश से पहले उचित अध्ययन और विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। यह खबर केवल शैक्षणिक और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।)

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