भारतीय ज्योतिष में वास्तुशास्त्र और चीनी ज्योतिष में फेंगशुई घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने के कई टिप्स देते हैं। जीवन में प्रगति के लिए सकारात्मक ऊर्जा का होना बेहद आवश्यक है। वास्तुशास्त्र और फेंगशुई में कुछ ऐसी चीजों का उल्लेख है, जिन्हें घर में रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। इन सब चीजों के प्रभाव से नकारात्मक ऊर्जा काटकर सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती है। आज हम जानेंगे कि घर में ऊंट की मूर्ति रखने के बारे में वास्तुशास्त्र क्या कहता है ?
घर में ऊँट की मूर्ति रखने का सही स्थान
वास्तु के अनुसार घर में ऊँट की मूर्ति रखना अत्यंत शुभ है। घर के उत्तर-पश्चिम दिशा में ऊँट की मूर्ति रखें। ऊँट की मूर्ति रखने के लिए यह सबसे शुभ दिशा है। यदि इस दिशा में संभव न हो तो पूर्व या उत्तर दिशा में भी रख सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप सुख और समृद्धि बढ़ेगी।
किस कमरे में ऊँट रखेंगे ?
ऊँट को घर में किस दिशा में रखना है यह तय करने के साथ-साथ यह भी तय करना कि किस कमरे में रखना है, उतना ही जरूरी है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, आप लिविंग रूम या ड्राइंग रूम में ऊँट की मूर्ति रख सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी और परिवार के सदस्यों के मन में आनंद रहेगा।
घर में ऊँट रखने का नियम
--वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में ऊँट की मूर्ति हमेशा जोड़े में रखनी चाहिए। इससे नौकरी और व्यवसाय में उन्नति होगी।
--सैलून या शो रूम में गलती से भी ऊँट की मूर्ति नहीं रखें। बाथरूम के पास, सीढ़ियों के नीचे, फर्श पर या मुख्य दरवाजे के सामने ऊँट की मूर्ति रखने से बचें।
--तांबे या पीतल से बनी ऊँट की मूर्ति घर में रखना शुभ माना जाता है। लकड़ी या पत्थर से बनी मूर्ति भी रख सकते हैं।
--ऊँट की मूर्ति खरीदते समय उसकी लंबाई पर ध्यान दें। बहुत बड़ी या बहुत छोटी मूर्ति नहीं रखें। घर में मध्यम आकार की मूर्ति रखना सबसे अच्छा है।
--ऊँट का चेहरा मुख्य दरवाजे की तरफ न हो। ऊँट का चेहरा घर के अंदर की तरफ होना चाहिए।
--टूटी हुई मूर्ति कभी भी घर में इकट्ठा न करें। इससे नकारात्मक ऊर्जा फैलती है। मूर्ति गंदी या धूल भरी न हो। साथ ही, जहाँ ऊँट की मूर्ति रखी है, उस स्थान को भी साफ रखना जरूरी है।
ऊँट की मूर्ति रखने के फायदे
घर में सही जगह पर ऊँट की मूर्ति रखने से परिवार में खुशहाली और सौभाग्य बढ़ता है। करियर में किसी समस्या का सामना करना पड़े तो ऊँट की मूर्ति के शुभ प्रभाव से उससे मुक्ति पाई जा सकती है। ऊँट सुधार के द्वार खोलता है। इसके प्रभाव से महत्वपूर्ण कार्यों के मार्ग में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं।