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‘ड्रामा नहीं, जवाब दीजिए’- मेट्रो किराया मुद्दे पर तेजस्वी सूर्या का कांग्रेस पर हमला

सीएम सिद्धारमैया के पुराने पोस्ट का हवाला, केंद्र-राज्य के बीच जिम्मेदारी को लेकर टकराव तेज।

By श्वेता सिंह

Feb 09, 2026 12:20 IST

नई दिल्ली/बेंगलुरुः प्रस्तावित बेंगलुरु मेट्रो किराया बढ़ोतरी को लेकर कर्नाटक की राजनीति में आरोप–प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर सीधा हमला करते हुए कहा है कि किराया बढ़ाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है, न कि केंद्र की।

रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तेजस्वी सूर्या ने मुख्यमंत्री का एक साल पुराना पोस्ट साझा किया, जिसमें सिद्धारमैया ने मेट्रो किराया घटाने का निर्देश दिया था। इसी को आधार बनाते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि अगर मुख्यमंत्री के पास किराया तय करने या बढ़ाने का अधिकार नहीं है ? जैसा कि वह अब दावा कर रहे हैं, तो फिर पहले किराया घटाने का आदेश किस अधिकार से दिया गया था। सूर्या ने टिप्पणी करते हुए लिखा-“जवाब इसी सवाल में छिपा है। ड्रामा बंद करें।”

यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार और केंद्र सरकार के बीच मेट्रो किराया बढ़ोतरी को लेकर जिम्मेदारी तय करने की होड़ मची हुई है। कर्नाटक कांग्रेस ने एक पोस्ट में केंद्र और भाजपा सांसदों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे दोहरा रवैया अपना रहे हैं। पार्टी ने कहा कि भाजपा सांसद पहले दावा करते हैं कि किराया बढ़ोतरी में केंद्र की कोई भूमिका नहीं है। अब दिल्ली से इसे ‘अस्थायी रूप से रोकने’ की गुहार लगा रहे हैं।

इससे पहले तेजस्वी सूर्या ने यह भी आरोप लगाया था कि कर्नाटक सरकार ने बार-बार मेट्रो किराया निर्धारण समिति से किराया बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बेंगलुरु मेट्रो किराए में 5 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव रखा था। इससे आम यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने कानून के तहत समय-समय पर किराया संशोधन की प्रक्रिया अपनाने की बात कही।

वहीं, उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने इस पूरे विवाद से खुद को अलग रखते हुए कहा है कि उनसे मेट्रो किराया बढ़ोतरी को लेकर कोई राय नहीं मांगी गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मेट्रो किराया निर्धारण समिति का नेतृत्व केंद्रीय सचिव करते हैं। कुल मिलाकर, बेंगलुरु मेट्रो किराया बढ़ोतरी अब केवल परिवहन नीति का मुद्दा नहीं रह गया है। केंद्र राज्य संबंधों और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बड़े विवाद का रूप ले चुका है। इसका असर सीधे लाखों दैनिक यात्रियों पर पड़ सकता है।

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