नंदीग्रामः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने अपने गढ़ नंदीग्राम में रोड शो कर भाजपा की भारी जीत का दावा किया है। वहीं दूसरी ओर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस के बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। पश्चिम बंगाल में चुनावी मुकाबला जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में बयानबाजी और रणनीति दोनों तेज होती जा रही हैं।
नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी का शक्ति प्रदर्शन
नंदीग्राम में आयोजित रोड शो के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह क्षेत्र पूरी तरह से भाजपा का मजबूत गढ़ बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा के साथ खड़ी है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस बार भाजपा पूरे राज्य में लगभग 177 सीटें जीत सकती है, जो उनकी “व्यक्तिगत राजनीतिक विश्लेषण” पर आधारित है। उनके अनुसार, नंदीग्राम सहित कई क्षेत्रों में जनता “तुष्टीकरण की राजनीति” के खिलाफ है।
भवानीपुर को लेकर ममता बनर्जी पर निशाना
शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि इस बार भवानीपुर सीट पर भी उन्हें बड़ा झटका लग सकता है। उनका कहना था कि जनता बदलाव चाहती है और भाजपा को व्यापक समर्थन मिल रहा है।
इसी बीच, चंद्र कुमार बोस ने BJP से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) का रुख किया और पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि BJP की राजनीति “डिवाइड एंड रूल” पर आधारित है, जो ब्रिटिश शासन की नीति जैसी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी समाज में धर्म के आधार पर विभाजन को बढ़ावा देती है, जो संविधान की भावना के खिलाफ है।
SIR और लोकतांत्रिक अधिकारों पर बहस
चंद्र कुमार बोस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसे “असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक” बताया और कहा कि इससे लाखों लोगों के वोटिंग अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। यह मुद्दा पहले से ही राज्य की राजनीति में विवाद का केंद्र बना हुआ है।
TMC की जीत का दावा और राजनीतिक ध्रुवीकरण
चंद्र कुमार बोस ने यह भी विश्वास जताया कि TMC आगामी चुनावों में जीत दर्ज करेगी। उनके बयान के बाद राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण और तेज हो गया है, जहां दोनों प्रमुख दल अपने-अपने नैरेटिव को मजबूत करने में जुटे हैं।
नंदीग्राम से लेकर कोलकाता तक पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय तीव्र मुकाबले के दौर में है। एक ओर शुभेंदु अधिकारी भाजपा की प्रचंड जीत का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चंद्र कुमार बोस के बयान ने वैचारिक बहस को नया मोड़ दे दिया है। चुनावी समीकरण अब केवल सीटों तक सीमित नहीं, बल्कि विचारधारा और नैरेटिव की लड़ाई में बदलते दिख रहे हैं।