कोलकाताः पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति में एक अहम वैचारिक बदलाव देखने को मिला है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन थाम लिया है। कोलकाता में हुए इस राजनीतिक घटनाक्रम को केवल दल-बदल नहीं, बल्कि विचारधारा और राजनीतिक दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। चुनावी माहौल के बीच यह कदम राज्य की सियासत में नई बहस को जन्म दे रहा है।
“BJP में जाना मेरी ऐतिहासिक भूल थी”
तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल होने के बाद चंद्र कुमार बोस ने सबसे पहले अपने पुराने राजनीतिक फैसले पर खुलकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भाजपा (BJP) में शामिल होना उनकी “ऐतिहासिक भूल” थी, क्योंकि समय के साथ वह पार्टी की विचारधारा और कार्यशैली की वजह से असहज महसूस करने लगे थे। उनके अनुसार, वे जिस समावेशी राजनीति में विश्वास रखते हैं, वह BJP की मौजूदा दिशा से मेल नहीं खाती।
“डिवाइड एंड रूल की राजनीति देश के लिए खतरनाक”
चंद्र कुमार बोस ने भाजपा (BJP) पर समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि “डिवाइड एंड रूल” की नीति लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है और यह देश की सामाजिक एकता के लिए नुकसानदायक है। उनके मुताबिक, विविधता वाले भारत में राजनीति का आधार जोड़ने वाला होना चाहिए, न कि तोड़ने वाला।
अपने रुख को स्पष्ट करते हुए उन्होंने नेताजी और शरत चंद्र बोस की विचारधारा का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं का सपना एक ऐसे भारत का था जहां सभी समुदाय साथ मिलकर आगे बढ़ें। उनके अनुसार, धर्म और पहचान के आधार पर राजनीति करना उस मूल सोच के विपरीत है।
TMC को बताया ‘समावेशी और सेक्युलर विकल्प’
तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के फैसले को उन्होंने विचारधारा आधारित बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राजनीति अधिक समावेशी और धर्मनिरपेक्ष लगी, जो सभी समुदायों को साथ लेकर चलने का दावा करती है। उनके अनुसार, वर्तमान समय में ऐसी ही राजनीति की जरूरत है जो विभाजन के बजाय एकता पर जोर दे।
SIR प्रक्रिया पर गंभीर सवाल और अधिकारों की चिंता
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी चंद्र कुमार बोस ने चिंता जताई। उन्होंने इसे “असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक” प्रक्रिया बताते हुए कहा कि इससे लाखों लोगों के मतदान अधिकार प्रभावित हुए हैं। उनके अनुसार, यदि नागरिकों के मूल अधिकारों पर ही सवाल उठने लगें तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर स्थिति है। चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि निष्पक्ष चुनाव कराना आयोग की जिम्मेदारी है, लेकिन मौजूदा हालात चिंताजनक हैं। उनके अनुसार, यदि चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर होता है तो लोकतंत्र की बुनियाद भी प्रभावित होती है।
ममता बनर्जी के नेतृत्व में भरोसा जताया
चंद्र कुमार बोस ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव में तृणमुूल कांग्रेस (TMC) को जनता का समर्थन मिलेगा क्योंकि पार्टी की नीति अधिक समावेशी है। उन्होंने इसे “जनहित और एकता की राजनीति” बताया।
चंद्र कुमार बोस का यह राजनीतिक कदम केवल पार्टी बदलने तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि यह एक स्पष्ट वैचारिक संदेश के रूप में सामने आया है। उनके बयान पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति में नए विमर्श को जन्म दे रहे हैं, जहां सत्ता की लड़ाई के साथ-साथ विचारधारा की टकराहट भी तेज होती दिख रही है।