हिंदू धर्म में तुलसी को केवल एक पेड़ के रूप में नहीं देखा जाता। इसे देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। यहाँ इसे स्वयं देवी का निवास स्थल माना जाता है। प्रचलित विश्वास है कि जिस घर में तुलसी की पूजा की जाती है वहां सुख, समृद्धि और संपत्ति का अविरत प्रवाह बना रहता है। यदि तुलसी देवी की पूजा करती है तो भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी दोनों प्रसन्न होते हैं। हालांकि, पेड़ का जन्म और मृत्यु होता है, यह जीवन चक्र का प्रतीक है।
तुलसी विसर्जन की विधि, समय और शुभ दिन
तुलसी का पौधा सूख जाने पर इसे पहले जड़ समेत निकालें। इस समय 'ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय' मंत्र का लगातार जाप करें। गलती से भी पौधे को अन्य कचरे के साथ न फेंकें। इसके बजाय इसे किसी नदी में विसर्जन दें। अगर पास में कोई नदी नहीं है तो जमीन में एक गहरा गड्ढा करके वहां तुलसी का पौधा दफन कर दें ताकि मिट्टी उर्वर हो। गुरुवार या शुक्रवार को सूखे तुलसी के पौधे को निकालने का समय शुभ माना जाता है। रविवार, एकादशी तिथि या ग्रहण के दिन तुलसी को छूएं नहीं और न ही विसर्जन करें।
तुलसी विसर्जन के बाद बची हुई मिट्टी अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इस मिट्टी को न फेंके, बल्कि एक नया तुलसी का पौधा लगाएं। इसे अन्य पौधों में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इस मिट्टी की उर्वरता और शक्ति में वृद्धि होती है। अगर तुलसी का पौधा जल्दी सूख जाए तो कुछ उपाय किए जा सकते हैं। पुराने या सूखे तुलसी के पौधे को हटाने के बाद, उस पर गंगाजल छिड़कें। फिर एक नया तुलसी का पौधा लगाएं। तुलसी के पौधे की जड़ों में जरूरत के अनुसार पानी डालें और ताजा दूध अर्पित करें। इससे देवी लक्ष्मी प्रसन्न होंगी और तुलसी का पौधा हरा-भरा रहेगा। तुलसी का पौधा उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाएं और सुनिश्चित करें कि पौधे के आसपास कोई गंदगी या काँटों वाला पेड़ न हो।