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माँ सरस्वती के सामने बच्चे का पहला अक्षर ज्ञान, क्या करें-क्या न करें ? जानें

आज सरस्वती पूजा मनाई जा रही है। इस दिन बच्चे को अक्षर ज्ञान कराने की परंपरा प्रचलित है। जानें कि अक्षर ज्ञान की पूजा कैसे आयोजित करें।

By श्रमणा गोस्वामी, Posted by: लखन भारती

Jan 23, 2026 11:03 IST

हिंदू धर्म के अनुसार मां सरस्वती विद्या की देवी हैं। वाणी की देवी सरस्वती हमें विद्या, बुद्धि और ज्ञान प्रदान करती हैं। माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को लगभग हर हिंदू के घर में छोटे-बड़े सभी लोग सरस्वती पूजा में शामिल होते हैं। विशेष रूप से छात्रों के लिए यह पूजा बेहद महत्वपूर्ण है। इसी कारण से शिक्षा संस्थानों में सरस्वती की आराधना की जाती है।

सरस्वती पूजा में अक्षरों की पहचान

सरस्वती पूजा के दिन बच्चों को अक्षरों की पहचान या ज्ञान करवाने की प्रथा प्रचलित है। अर्थात् माँ सरस्वती को साक्षी मानकर, उनकी आशीर्वाद लेकर बच्चों की विद्या शिक्षा का औपचारिक आरंभ किया जाता है। सरस्वती पूजा के साथ बच्चों को अक्षरों की पहचान करवाने की प्रथा गहराई से जुड़ी हुई है। अर्थात् इसी दिन बच्चों को अक्षरों से पहली बार परिचय कराया जाता है। माँ, पिता या पुजारी बच्चे का हाथ पकड़कर स्लेट पर उसे पेंसिल से क, ख लिखना सिखाते हैं। इसी तरह माँ सरस्वती की पूजा कर बच्चों को शिक्षित जीवन में पहली औपचारिक प्रवेश कराते हैं।

बच्चे की पहली शिक्षा समारोह में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए ?

अगर आपके बच्चे के हाथों में स्लेट-पेंसिल देने का कार्यक्रम सरस्वती पूजा में होना है, तो सबसे पहले जान लें कि उस दिन का शुभ समय आपके बच्चे के लिए अच्छा है या नहीं। अक्षरों की पहचान बच्चे के जीवन का एक विशेष दिन होता है। यह उसकी पहली शिक्षा की शुरुआत है। इसलिए शुभ समय देखकर ही इसकी शुरुआत करनी चाहिए।

शुभ समय क्या है, यह जानने के लिए ज्योतिषी से संपर्क करें।

सरस्वती पूजा संपन्न होने के बाद मुख्य रूप से पुरोहित से स्लेट पर अ आ क ख लिखवाकर बच्चे को अक्षरों की पहचान करवाई जाती है लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि किसी भी इंसान का पहला और सबसे बड़ा गुरु उसकी माँ होती है। इसलिए माँ से यह काम करवाना ज्यादा उचित है।

हालांकि किसी कारणवश माँ ऐसा नहीं करवा पाती, तो पिता यह काम कर सकते हैं। पिता की अनुपस्थिति में या फिर यह काम चाचा द्वारा भी किया जा सकता है।

पुरोहित की उपस्थिति में माँ, सरस्वती के सामने पुष्पांजलि देने के बाद अक्षरों की पहचान की परंपरा पूरी की जा सकती है।

जो व्यक्ति अक्षरों की पहचान करवाएगा, वह बच्चे का हाथ पकड़कर अ आ क ख लिखवाने के बाद स्लेट पर खुद ‘ह्रीं सरस्वती देव्यै नमः’ मंत्र लिखेगा। इससे बच्चा मेधावी बनेगा।

अक्षरों की पहचान बच्चे के जीवन का एक विशेष दिन है। इसलिए इस दिन उसे नया कपड़ा जरूर पहनाना चाहिए।

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