गौतम गंभीर पर भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) बेहद नाराज है। टीम इंडिया के मुख्य कोच के बेबाक बयान पर वे बिल्कुल खुश नहीं। असल में, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ईडन में टेस्ट हारने के बाद पिच को लेकर गंभीर ने जो टिप्पणी की थी, वह बोर्ड को पसंद नहीं आयी है।
हालांकि बोर्ड अभी कोई तात्कालिक कदम नहीं उठा रहा है। सूत्रों के मुताबिक विकल्पों की कमी होने की वजह से गंभीर फिलहाल पद पर बने रहेंगे। फिर भी साल के अंत में उनके बने रहने पर फिर सवाल उठ सकते हैं। खासकर अगर फिर से भारत घरेलू मैदान पर होने वाले टी-20 विश्वकप में खराब प्रदर्शन करता है।
गंभीर का पिच पर खुला समर्थन- बोर्ड को रास नहीं आया
बोर्ड की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह है गंभीर का ईडन गार्डेन्स की काली मिट्टी वाली पिच का खुला समर्थन करना। इस पिच की कड़ी आलोचना हुई थी क्योंकि ईडन में भारत की बल्लेबाज़ी बिखर गई थी। चौथी पारी में टीम इंडिया मात्र 93 पर ऑलआउट हो गई और 30 रन से मैच हार गई।
गंभीर ने दावा किया कि पिच बिल्कुल वैसी ही थी जैसी टीम चाहती थी। इसके बाद गुवाहाटी में भी अच्छी बैटिंग पिच पर भारत ढह गया।
“हमने जो मांगा वही मिला…” - गंभीर
ईडन पिच को लेकर गौतम गंभीर ने खुलकर कहा था - “यह वही पिच है जिसे हम ढूंढ रहे थे। क्यूरेटर बहुत सहायक थे। हमने जो मांगा, वही पाया। अगर ठीक से खेलोगे नहीं तो ऐसा ही होगा।”
उन्होंने आगे कहा - “हो सकता है इस विकेट पर बड़े-बड़े शॉट खेलना आसान न हो लेकिन अगर सिर झुकाकर खेलना चाहो तो रन बन सकते हैं। इस विकेट में कुछ भी खतरनाक नहीं था। यह खेलने लायक नहीं थी, ऐसा नहीं। बल्कि यहां तुम्हारी तकनीक, मानसिक मजबूती और सबसे बढ़कर तुम्हारा स्वभाव परखा जाता है। असली बात है-टर्न को कैसे खेलना है, यह जानना। हमने जो चाहा वही मिला।”
इन बयानों ने BCCI के भीतर हलचल मचा दी। कोलकाता की काली मिट्टी की पिच और गुवाहाटी की लाल मिट्टी की पिच-दोनों ही जगह भारतीय बल्लेबाज़ों की नाकामी ने टीम की तैयारी और रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
टेस्ट टीम के खराब हाल पर जल्द समीक्षा
बोर्ड जल्द ही टेस्ट में टीम इंडिया की कमजोरी को लेकर व्यापक समीक्षा करेगा जिसमें गंभीर और मुख्य चयनकर्ता अजीत आगरकर भी शामिल होंगे। हालांकि फिलहाल किसी बड़े बदलाव की योजना नहीं है।
‘स्प्लिट कोचिंग’ के विचार को अभी अव्यवहारिक माना गया है और विकल्प भी बहुत कम हैं। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं होता। एक बोर्ड अधिकारी ने संकेत दिया है कि “व्हाइट-बॉल सीज़न के बाद गहराई से चर्चा होगी।”
इसका मतलब साफ है कि 2026 T20 विश्वकप में भारत का प्रदर्शन ही गंभीर के दीर्घकालिक भविष्य को तय करेगा। घरेलू मैदान पर असफलता नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा को फिर तेज कर सकती है।
BCCI और गंभीर के बीच बढ़ती दूरी फिलहाल दबी जरूर है लेकिन खत्म नहीं हुई। अब निगाहें टी-20 विश्वकप पर टिक गई हैं जहां टीम इंडिया का प्रदर्शन ही तय करेगा कि गंभीर की कोचिंग यात्रा आगे बढ़ेगी या नहीं।