जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट, जिहाद और SIR को लेकर विवादित बयान देकर राजनीतिक हलकों में तूफान खड़ा कर दिया। उत्तर प्रदेश में आयोजित जमीयत के कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट को अब सुप्रीम नहीं कहा जा सकता।” उनके इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया और राजनीतिक दलों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएँ शुरू हो गईं।
सुप्रीम कोर्ट पर निशाना
मदनी ने 1991 के उपासना स्थलों के कानून (Places of Worship Act) का उल्लेख करते हुए सुप्रीम कोर्ट पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा,“उपासना स्थल कानून होने के बावजूद बाबरी मस्जिद, तीन तलाक के फैसले कोर्ट ने जिस तरह दिए, उससे लगता है कि अदालत सरकार के दबाव में है। अब ज्ञानवापी और मथुरा मामलों की सुनवाई भी शुरू हो गई है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो सुप्रीम कोर्ट को सुप्रीम नहीं कहा जा सकता जब तक कि वह संविधान के अनुसार काम न करे।”
जिहाद पर दिया विवादास्पद बयान
मदनी ने जिहाद पर भी बयान देते हुए कहा, “इस्लाम में जिहाद एक पवित्र अवधारणा है लेकिन आज इसे नकारात्मक शब्द बना दिया गया है। ‘लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद’ जैसे शब्दों से मुस्लिम समुदाय को बदनाम किया जा रहा है। सरकार और मीडिया भी इन्हें इस्तेमाल कर रही है। जब जुल्म होगा, तो जिहाद भी होगा।”
SIR को लेकर केंद्र पर हमला
मदनी ने SIR (Special Intensive Revision) को भी खतरनाक बताते हुए कहा कि “यह एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है लेकिन देश की 60% जनता चुप बैठी है।” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा स्थिति बेहद संवेदनशील है और “एक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है-मॉब लिंचिंग, बुलडोजर एक्शन, वक्फ संपत्तियों पर कब्जा, मदरसों और धार्मिक संस्थानों के खिलाफ नकारात्मक प्रचार चल रहा है।”
BJP का कड़ा पलटवार
मदनी के बयान पर BJP ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने कहा, “इस बयान में सिर्फ उकसावा ही नहीं, बल्कि समाज को बांटने की पूरी कोशिश है। जिहाद की गलत व्याख्या बेहद खतरनाक है। पूरी दुनिया देख रही है कि जिहाद के नाम पर कैसे आतंक फैलाया गया। ऐसे बयानों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”