नई दिल्ली: देशभर में बढ़ते वायु प्रदूषण और सुरक्षित पेयजल के असमान वितरण के परिप्रेक्ष्य में घरेलू उपयोग में आने वाले एयर प्यूरीफायर और वाटर प्यूरीफायर पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) की दर कम करने पर जीएसटी काउंसिल विचार कर सकती है। अगले 15 दिनों के भीतर काउंसिल की एक बैठक बुलाए जाने की संभावना है। जिसमें इस विषय पर चर्चा हो सकती है।
मामले से जुड़े जानकारों के अनुसार इन उत्पादों को विलासिता की वस्तु के रूप में न देखकर आवश्यक वस्तुओं की सूची में शामिल करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप इन दोनों उत्पादों पर मौजूदा 18 प्रतिशत जीएसटी दर घटकर 5 प्रतिशत हो सकती है।
वर्तमान स्थिति में देश के कई शहरों में विशेष रूप से उत्तर भारत के बड़े हिस्से में वायु प्रदूषण गंभीर रूप ले चुका है। साथ ही गांव और शहरों के कई इलाकों में अब भी शुद्ध पेयजल की विश्वसनीय व्यवस्था नहीं है। इस पृष्ठभूमि में उद्योग जगत और विभिन्न हितधारक यह दावा कर रहे हैं कि एयर और वाटर प्यूरीफायर जैसे उत्पाद सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य से जुड़े हुए हैं। उनका तर्क है कि ऊंची जीएसटी दर के कारण इन उत्पादों की कीमत आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही है जो जनस्वास्थ्य की रक्षा के व्यापक उद्देश्य के अनुरूप नहीं है।
इस विषय पर वित्त मंत्रालय और जीएसटी काउंसिल सचिवालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। हालांकि सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी ने बताया है कि एयर और वाटर प्यूरीफायर के साथ-साथ घरेलू उपयोग में आने वाले कुछ कीटनाशकों और चूहों को मारने में इस्तेमाल होने वाले रोडेंटिसाइड पर भी जीएसटी घटाने का प्रस्ताव चर्चा में आ सकता है। फिलहाल इन सभी उत्पादों पर भी 18 प्रतिशत कर लगाया जा रहा है और इन्हें 5 प्रतिशत कर के दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि कर विशेषज्ञ इस बात को लेकर सतर्क कर रहे हैं कि केवल कर दर घटने से ही उपभोक्ताओं को उसी अनुपात में कीमतों में कमी का लाभ मिलेगा यह जरूरी नहीं है। उनके अनुसार यदि कच्चे माल या इनपुट पर जीएसटी दर अपरिवर्तित रहती है तो आउटपुट टैक्स कम होने के बावजूद इनपुट टैक्स क्रेडिट के जमा होने की समस्या पैदा हो सकती है। कर विशेषज्ञ अभिषेक ए. रस्तोगी के शब्दों में इनपुट पर ऊंचा कर बने रहने से कम आउटपुट टैक्स का लाभ आंशिक रूप से कम हो सकता है।
हाल ही में अदालत के हस्तक्षेप से इस मुद्दे को नई गति मिली है। 24 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह जल्द से जल्द आवश्यकता पड़ने पर वर्चुअल माध्यम से भी जीएसटी काउंसिल की बैठक बुलाकर एयर प्यूरीफायर पर कर घटाने के मुद्दे पर विचार करे। अदालत में केंद्र की ओर से कहा गया कि इस तरह का फैसला पैंडोरा का पिटारा खोल सकता है। इसके साथ ही राजनीतिक हलकों में भी दबाव बढ़ रहा है। पिछले नवंबर में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एयर और वाटर प्यूरीफायर पर जीएसटी पूरी तरह हटाने की मांग की थी। उद्योग और व्यापार संगठनों ने भी अलग-अलग तौर पर कर दर को 5 प्रतिशत तक घटाने की मांग की है। इन मांगों को संसद की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन संबंधी स्थायी समिति ने और अधिक मजबूती दी है।