मुंबई: महाराष्ट्र के एक दूरस्थ गांव में इलाज और सड़क की कमी के कारण एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। 9 महीने की गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचने के लिए जंगल के रास्ते से 6 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। इतनी कोशिशों के बाद भी न मां बच पाई, न उसका बच्चा।
यह घटना महाराष्ट्र के गढ़चिरौली ज़िले के इटापल्ली तालुका के अलदांडी टोला गांव की है। यहां की रहने वाली 24 साल की आशा संतोष किरंगा 9 महीने की गर्भवती थी। गांव मुख्य पक्की सड़क से कटा हुआ है और वहां प्रसव की कोई सुविधा नहीं है। इलाज के लिए आशा के पति उन्हें पास के पेठा गांव में उनकी बहन के घर ले जा रहे थे लेकिन सड़क न होने की वजह से आशा को जंगल के कठिन रास्ते पर पैदल चलना पड़ा। उसी दौरान उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। किसी तरह पक्की सड़क तक पहुंचने के बाद उन्हें एंबुलेंस से हेदरी के काली अम्माल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि बहुत देर हो चुकी थी। गर्भ में ही बच्चे की मौत हो चुकी थी और हाई ब्लड प्रेशर के कारण माँ की हालत भी गंभीर थी। ऑपरेशन (सीजेरियन) की कोशिश की गई लेकिन आशा की जान भी नहीं बच सकी।
जिले के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रताप शिंदे ने कहा कि गर्भावस्था के आख़िरी समय में इतना पैदल चलना बहुत खतरनाक होता है। इससे अचानक दर्द और गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। जहां देश में बड़ी-बड़ी सड़कें, हाईवे और बुलेट ट्रेन के सपने देखे जा रहे हैं, वहीं सिर्फ सड़क और इलाज की कमी की वजह से एक मां और उसके बच्चे की जान चली गई।