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विद्यासागर विश्वविद्यालय में निर्मल वर्मा पर संगोष्ठी का आयोजन

निराशा, उदासी और अकेलेपन के बीच जीवन की तलाश है 'परिंदे' कहानी

By लखन भारती

Jun 09, 2026 18:06 IST

मिदनापुर: विद्यासागर विश्वविद्यालय, हिंदी विभाग की ओर से नई कहानी के प्रमुख कहानीकार निर्मल वर्मा पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘नई कहानी के संदर्भ में परिंदे’ कहानी पर आयोजित इस संगोष्ठी में स्वागत वक्तव्य देते विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार प्रसाद ने कहा निर्मल वर्मा नई कहानी के प्रवर्तक कहानीकारों में प्रमुख थे। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन की विसंगतियों को देखा जा सकता है। डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि निर्मल वर्मा नई कहानी के प्रमुख हस्ताक्षरों में से एक हैं। परिंदे कहानी वर्तमान की जमीन पर खड़ी होकर पीछे मुड़-मुड़ कर देखने का आख्यान है। विस्थापन हमारे समय का सच है और विस्थापन का दंश इस कहानी के पात्र ‘मिस्टर मुखर्जी’ को झेलना पड़ता है। इसमें प्रेम, युद्ध स्मृति,अवसाद और उम्मीद का का आख्यान है। लतिका निराशा , उदासी और अकेलेपन के बीच जीवन की तलाश करती है। डॉ. श्रीकांत द्विवेदी ने कहा कि आधुनिकताबोध आज का सबसे बड़ा संकट है।

परास्नात्तकोतर के छात्र प्रिंशु ठाकुर ने कहा निर्मल वर्मा ने परिंदे कहानी के माध्यम से अपने समय को यथार्थ रूप में चित्रित किया है। शबाना ख़ातून ने कहा परिंदे कहानी प्रेम और जीवन को अतीत और वर्तमान दो रूपों में हमारे समक्ष रखती है। उषा कुमारी दूबे ने कहा परिंदे कहानी में जीवन की नई उड़ान भरने की संभावना बची दिखाई देती है। कार्यक्रम का संचालन करती हुई विभाग की शोधार्थी सुषमा कुमारी ने कहा परिंदे मध्यवर्गीय जीवन में व्यक्ति के बाहरी और भीतरी अंतर्द्वंद्व को रेखांकित करता जीवन को नई तरह से देखने व समझने का दस्तावेज है। इस परिचर्चा में विभाग के शोधार्थी रूपेश यादव, टीना परवीन, गायत्री वाल्मीकि, नेहा चौबे तथा छात्र-छात्राओं में प्रियांशु ठाकुर, श्रुति पाड़ी, नीतू शर्मा, अंकिता जायसवाल, ज्योति कुमारी, मनीषा राय, नाज परवीन, नविन शर्मा, नंदिनी शर्मा और ख़ुशी ठाकुर ने भाग लिया।

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