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सरकारी अस्पताल में डिलीवरी के बाद 5 प्रसूताओं की किडनी फेल, अब बीकानेर में कोटा जैसी घटना

स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने मंगलवार को स्वास्थ्य भवन में उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।

By लखन भारती

Jun 09, 2026 18:34 IST

बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में डिलीवरी के बाद पांच प्रसूताओं की तबीयत अचानक बिगड़ने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। महिलाओं में किडनी फेल होने, संक्रमण, प्लेटलेट्स कम होने और यूरिन रुकने जैसी गंभीर समस्याएं सामने आने के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। सभी प्रभावित महिलाओं का इलाज अस्पताल के आईसीयू में चल रहा है, जबकि एक प्रसूता की हालत गंभीर बनी हुई है।

मामला सामने आने के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने मंगलवार को स्वास्थ्य भवन में उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। मंत्री ने अधिकारियों से पूरे मामले की विस्तृत जानकारी ली और जांच रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

बैठक के बाद चिकित्सा मंत्री ने कहा कि बीकानेर में सामने आया यह मामला कोटा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत के मामले से अलग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों घटनाओं की परिस्थितियां अलग-अलग हैं और इन्हें एक-दूसरे से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। मंत्री के अनुसार बीकानेर में जिन महिलाओं की तबीयत बिगड़ी है, उनमें केवल सिजेरियन डिलीवरी वाले मरीज ही नहीं, बल्कि सामान्य प्रसव कराने वाली महिलाएं भी शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार, बीमार हुई पांच महिलाओं में से दो की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी, जबकि तीन महिलाओं ने सामान्य प्रसव के जरिए बच्चों को जन्म दिया था। डिलीवरी के करीब 10 से 15 दिन बाद इन महिलाओं में गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जांच के दौरान किडनी से जुड़ी समस्याएं और अन्य जटिलताएं सामने आईं।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार सभी मरीजों को आईसीयू में भर्ती कर आवश्यक उपचार दिया जा रहा है। कुछ मरीजों का डायलिसिस भी किया जा रहा है। फलोदी निवासी 20 वर्षीय एक प्रसूता की हालत अधिक गंभीर बताई जा रही है और उसका इलाज वेंटिलेटर पर किया जा रहा है।

पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बीसी घीया ने बताया कि गर्भावस्था और प्रसव के बाद कई बार गंभीर चिकित्सकीय जटिलताएं सामने आती हैं। हालांकि पिछले कुछ दिनों में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने मरीजों की विस्तृत जांच शुरू की है। उन्होंने कहा कि सभी मरीजों की निगरानी की जा रही है और उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक जांच समिति गठित की है। यह समिति संक्रमण, अत्यधिक रक्तस्राव, दवाओं के प्रभाव और अन्य संभावित चिकित्सकीय कारणों की जांच कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के पीछे वास्तविक कारण क्या था।

इस बीच मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर पर्याप्त जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्हें मरीजों की स्थिति और बीमारी के कारणों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है।

चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने यह भी स्वीकार किया कि राज्य के अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण और व्यवस्थागत सुधारों को लेकर अभी और काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों की निगरानी को मजबूत बनाने के लिए सरकार थर्ड पार्टी एजेंसियों की सेवाएं लेने पर विचार कर रही है। इसके तहत निजी एजेंसियां नियमित निरीक्षण कर अस्पतालों की व्यवस्थाओं और संक्रमण नियंत्रण उपायों की रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगी।

फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और स्वास्थ्य विभाग जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि प्रसूताओं की हालत बिगड़ने के पीछे कोई चिकित्सकीय लापरवाही थी या फिर यह प्रसव के बाद उत्पन्न हुई जटिलताओं का परिणाम था।

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