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विनेश फोगाट को बड़ी राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने एशियाई खेल ट्रायल में भाग लेने की दी अनुमति

ट्रायल की वीडियो रिकॉर्डिंग और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की निगरानी के आदेश।

By शिखा सिंह

May 24, 2026 14:43 IST

धर्मशाला : भारतीय जनता पार्टी की नेता और पूर्व पहलवान बबीता फोगाट ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट को 30 और 31 मई को होने वाले एशियाई खेल 2026 चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दी गई है।

दिल्ली उच्च न्यायालय का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब भारतीय कुश्ती महासंघ ने विनेश फोगाट को घरेलू कुश्ती प्रतियोगिताओं के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। बबीता फोगाट, जो खुद भी पूर्व अंतरराष्ट्रीय पहलवान रह चुकी हैं, उन्होंने अदालत के फैसले को पूरी तरह सही बताते हुए उसका समर्थन किया।

उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, “मैं अदालत के फैसले को स्वीकार करती हूं और यह फैसला बिल्कुल सही है। मामला चाहे जो भी हो, अदालत अपना निर्णय दे चुकी है। अदालत से बड़ा कुछ नहीं होता, इसलिए हमें इस फैसले का सम्मान करना चाहिए और अदालत का धन्यवाद करना चाहिए।”

रविवार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने न सिर्फ विनेश फोगाट को एशियाई खेल चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दी, बल्कि यह भी निर्देश दिया कि पूरे चयन ट्रायल की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाए। साथ ही भारतीय खेल प्राधिकरण और भारतीय ओलंपिक संघ के स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की निगरानी में ट्रायल आयोजित किए जाएं।

भारतीय कुश्ती महासंघ ने 9 मई को विनेश फोगाट को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। महासंघ ने उनके खिलाफ कई मुद्दे उठाए थे, जिनमें 2024 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के दौरान वजन सीमा पूरी न कर पाना, कथित एंटी-डोपिंग लोकेशन संबंधी चूक और ओलंपिक क्वालीफायर ट्रायल में दो अलग-अलग भार वर्गों में हिस्सा लेना शामिल था।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने यह निर्देश उस अपील पर सुनवाई के दौरान दिए, जिसमें विनेश फोगाट ने एकल पीठ के अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी। एकल पीठ ने भारतीय कुश्ती महासंघ की चयन नीति और जारी कारण बताओ नोटिस के खिलाफ दाखिल याचिका में उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था।

अदालत ने निर्देश दिया कि विनेश फोगाट को चयन ट्रायल में हिस्सा लेने दिया जाए। पूरे ट्रायल की वीडियो रिकॉर्डिंग भारतीय कुश्ती महासंघ करेगा, जबकि भारतीय खेल प्राधिकरण और भारतीय ओलंपिक संघ द्वारा नियुक्त दो स्वतंत्र पर्यवेक्षक ट्रायल की निगरानी करेंगे और अपनी रिपोर्ट मामले की सुनवाई कर रही एकल पीठ के समक्ष पेश करेंगे।

अंतरिम राहत देते हुए अदालत ने महिला खिलाड़ियों के मातृत्व अधिकारों को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। अदालत ने कहा कि मातृत्व को किसी खिलाड़ी के पेशेवर करियर में बाधा या प्रतिकूल व्यवहार का आधार नहीं माना जा सकता।

अदालत ने आगे कहा कि कोई भी कानूनी या नियामक व्यवस्था, जो गर्भावस्था या प्रसव के बाद की स्थिति के कारण महिला खिलाड़ी के साथ भेदभाव करती है, वह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत समानता और गरिमा के सिद्धांतों का उल्लंघन होगी।

खंडपीठ ने यह भी माना कि महिला खिलाड़ियों को गर्भावस्था और प्रसव के बाद असाधारण शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन खेल व्यवस्थाओं में अक्सर इन परिस्थितियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। अदालत ने कहा कि मातृत्व के प्रति संवेदनशीलता और संस्थागत सहयोग जरूरी है तथा इसे किसी खिलाड़ी को बाहर करने या हाशिये पर डालने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।

विनेश फोगाट ने 25 फरवरी 2026 की भारतीय कुश्ती महासंघ की एशियाई खेल चयन नीति और 6 मई 2026 के उस परिपत्र को चुनौती दी थी, जिसमें केवल 2025 और 2026 में आयोजित चुनिंदा घरेलू प्रतियोगिताओं के पदक विजेताओं को ही चयन ट्रायल में भाग लेने के योग्य माना गया था।

अदालती आदेश के अनुसार विनेश फोगाट ने दिसंबर 2024 में अंतरराष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी को सूचित किया था कि वह गर्भावस्था के कारण खेल से अस्थायी अवकाश ले रही हैं और बाद में प्रतिस्पर्धा में वापसी करेंगी। जुलाई 2025 में उन्होंने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया और इसके बाद दोबारा प्रशिक्षण शुरू किया। बाद में अंतरराष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने पुष्टि की कि वह 1 जनवरी 2026 से प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए पात्र होंगी।

अदालत ने कहा कि मातृत्व से जुड़े अवकाश के कारण विनेश फोगाट उन प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले सकीं, जिन्हें भारतीय कुश्ती महासंघ की चयन नीति के तहत पात्रता का आधार बनाया गया था। इसी वजह से उन्हें चयन ट्रायल से बाहर कर दिया गया।

खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया माना कि यह नीति और परिपत्र मनमाना और भेदभावपूर्ण प्रतीत होता है, क्योंकि इसमें केवल कुछ विशेष प्रतियोगिताओं के पदक विजेताओं को ही अवसर दिया गया, जिससे विनेश फोगाट जैसे खिलाड़ी बाहर हो गए।

अदालत ने पेरिस ओलंपिक 2024 के वजन विवाद को लेकर विनेश फोगाट को जारी कारण बताओ नोटिस में भारतीय कुश्ती महासंघ की टिप्पणियों पर भी कड़ी नाराजगी जताई। महासंघ ने उस घटना को “राष्ट्रीय शर्मिंदगी” बताया था। अदालत ने इन टिप्पणियों को “निंदनीय” करार देते हुए कहा कि ये टिप्पणियां प्रतिशोधात्मक और पूर्वनियोजित लगती हैं, खासकर तब जब खेल पंचाट न्यायालय पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि विनेश फोगाट की ओर से कोई गलती नहीं हुई थी।

हालांकि खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दी है। अदालत ने कहा कि एकल पीठ के समक्ष लंबित याचिका पर स्वतंत्र रूप से सुनवाई होगी और उसी के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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