कोलकाता : सात वर्षों की लगातार मेहनत के बाद आखिरकार पश्चिम मेदिनीपुर के पिंगला की जिम्नास्ट प्रणति नायक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने पदक का रंग बदलने में सफलता हासिल कर ली। शनिवार को उज़्बेकिस्तान के ताशकंद में आयोजित वर्ल्ड चैलेंज कप की वॉल्ट स्पर्धा में 31 वर्षीय प्रणति ने रजत पदक जीतकर बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। इसी स्पर्धा में बंगाल की प्रतिष्ठा सामंत पांचवें स्थान पर रहीं। पदक की दौड़ में प्रणति का मुकाबला वियतनाम और उज़्बेकिस्तान की जिम्नास्टों से था, जिन्होंने क्रमशः स्वर्ण और कांस्य पदक जीते।
शनिवार रात ताशकंद से फोन पर बातचीत करते हुए प्रणति ने कहा, “पिछले वर्ष अक्टूबर में टखने में चोट लगने के बाद मैं लंबे समय तक किसी बड़े टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले पा रही थी। आगे एशियन चैंपियनशिप और एशियन गेम्स जैसे बड़े मुकाबले हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पूरी तरह फिट न होने के बावजूद मैंने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, ताकि आत्मविश्वास वापस हासिल कर सकूं। इस रजत पदक ने मेरा आत्मविश्वास लौटा दिया है। अब मेरा लक्ष्य अगले महीने होने वाली एशियन चैंपियनशिप में पदक जीतना है।”
प्रणति को वर्ष 2018 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक मिलने शुरू हुए थे। हालांकि अपरेटर्स वर्ल्ड कप में दो कांस्य पदक जीतने के बाद भी वह एशियन जिम्नास्टिक्स चैंपियनशिप में लगातार तीन बार तीसरे स्थान पर रहकर कांस्य पदक तक ही सीमित थीं। तमाम कोशिशों के बावजूद वह अपने पदक का रंग नहीं बदल पा रही थीं।
बंगाल में जिम्नास्टिक्स के लिए पर्याप्त आधारभूत संरचना और सुविधाएं न होने के कारण प्रणति को ओडिशा जाना पड़ा। वहां उन्होंने कोच अशोक मिश्रा के मार्गदर्शन में अभ्यास किया और उसी मेहनत का परिणाम अब ताशकंद में मिले इस रजत पदक के रूप में सामने आया है।