लंदन : भारतीय महिला क्रिकेट टीम को आईसीसी महिला विश्व कप में हाल ही में मिली ऐतिहासिक सफलता की सुखद यादों के साथ उतरने जा रही है। वहीं ऑस्ट्रेलिया में हाल में जीती गई टी-20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला ने भी टीम के आत्मविश्वास को और मजबूत किया है।
भारतीय टीम की स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने कहा कि टीम वन डे विश्वकप में मिली जीत की इस शानदार लय को आगे भी जारी रखना चाहती है और एक बार फिर वैश्विक मंच पर आईसीसी खिताब जीतने की भूख खिलाड़ियों के भीतर साफ दिखाई दे रही है।
आईसीसी की वेबसाइट से बातचीत में स्मृति मंधाना ने कहा, “निश्चित रूप से हम अपनी अच्छी फॉर्म को जारी रखना चाहेंगे, खासकर 50 ओवर के विश्व कप में मिली सफलता के बाद। इसके अलावा महिला प्रीमियर लीग भी काफी अच्छी रही, जहां कई खिलाड़ियों को महत्वपूर्ण अनुभव मिला। फिर ऑस्ट्रेलिया में टी-20 श्रृंखला जीतना भी टीम के लिए बहुत अहम रहा।”
उन्होंने आगे कहा, “हालांकि क्रिकेट में हर बार नई शुरुआत करनी होती है। लेकिन मुझे लगता है कि इस टीम की सबसे बड़ी ताकत उसकी भूख है। हर खिलाड़ी सही चीजें करने और टीम को सफलता दिलाने के लिए बेहद उत्साहित और समर्पित नजर आ रहा है।”
भारतीय टीम की ताकत बनी आक्रामक बल्लेबाजी
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय महिला टीम ने पावर-हिटिंग के मामले में काफी सुधार किया है। ऋचा घोष, शेफाली वर्मा और कप्तान हरमनप्रीत कौर जैसी खिलाड़ियों ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से अलग पहचान बनाई है।
इस निडर बल्लेबाजी शैली का असर स्मृति मंधाना जैसी बल्लेबाजों पर भी पड़ा है और अब भारतीय टीम की बल्लेबाजी पहले से कहीं ज्यादा गहराई और आक्रामकता के साथ मैदान पर उतरती है।
स्मृति मंधाना ने कहा, “एक शीर्ष क्रम की बल्लेबाज के तौर पर मुझे बहुत अच्छा लगता है कि हमारे बाद इतने पावर हिटर बल्लेबाजी के लिए आते हैं। इससे हमें अपनी पारी को थोड़ा समय देकर बनाने का मौका मिलता है।”
उन्होंने आगे कहा कि पहले यह भारतीय टीम की पारंपरिक ताकत नहीं मानी जाती थी। लेकिन अब यह हमारी सबसे बड़ी ताकत बनती जा रही है क्योंकि हमारे पास शेफाली वर्मा, ऋचा घोष जैसी खिलाड़ी हैं। हरमनप्रीत कौर तो लंबे समय से ऐसा करती आ रही हैं। इसके अलावा जेमिमा रोड्रिग्स और मैं भी जानती हूं कि किस तरह उसी स्ट्राइक रेट के आसपास खेलते हुए टीम को आगे बढ़ाया जा सकता है।
17 साल की उम्र में खेला था पहला विश्व कप
स्मृति मंधाना ने 2014 में मात्र 17 साल की उम्र में टी-20 विश्व कप में पदार्पण किया था। उस समय उन्हें सबसे ज्यादा प्रेरणा दुनिया की बड़ी टीमों को मिलने वाले सम्मान से मिली थी।
उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलियाई टीम को मिलने वाला सम्मान देखकर उनके भीतर भी विश्व कप जीतने का सपना पैदा हुआ।
29 वर्षीय स्मृति मंधाना ने कहा, “जब मैंने अपना पहला विश्व कप खेला, तब मेरी उम्र 16 या 17 साल थी। उस समय आप ज्यादा चीजों के बारे में नहीं सोचते। लेकिन मैंने ऑस्ट्रेलियाई टीम को मिलने वाला सम्मान देखा और तभी मुझे लगा कि मुझे भी वही चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि एक खिलाड़ी के तौर पर यह चीज मेरे लिए बेहद आकर्षक थी कि जब भारतीय टीम मैदान पर उतरे तो उसे भी उसी तरह का सम्मान मिले। तभी से मेरे मन में यह भावना आई कि मैं भारत के लिए विश्व कप जीतना चाहती हूं। मैं विश्व कप जीतना चाहती हूं क्योंकि मैं वह एहसास महसूस करना चाहती हूं।
इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 श्रृंखला से होगी तैयारी
भारतीय महिला टीम विश्व कप अभियान की शुरुआत से पहले England women's cricket team के खिलाफ तीन मैचों की टी-20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला खेलेगी। इसके बाद टीम 14 जून से अपने विश्व कप अभियान की शुरुआत करेगी।