नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। इस बीच केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि भारत आने वाले वर्षों में सिंधु नदी के पानी को पूरी तरह अपने उपयोग में लाने की दिशा में काम कर रहा है। उनका कहना है कि सरकार की योजना के तहत पाकिस्तान को जाने वाले पानी को रोककर देश के जरूरतमंद राज्यों तक पहुंचाया जाएगा।
एनडीटीवी को दिए एक विशेष इंटरव्यू में सीआर पाटिल ने कहा कि भारत ने सिंधु जल समझौते को निलंबित करने के बाद कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि छोटे-छोटे बांधों और अन्य परियोजनाओं के माध्यम से पानी को रोकने और उसे दूसरी दिशा में मोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उनका दावा है कि अगले दो वर्षों में सिंधु नदी का पानी पाकिस्तान की ओर जाने से काफी हद तक रोका जा सकेगा।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, सरकार का लक्ष्य 8 जून 2028 तक सिंधु नदी के पानी का अधिकतम उपयोग भारत के भीतर करना है। इससे जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली जैसे राज्यों में पानी की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में लंबे समय से जल संकट की समस्या बनी हुई है और सरकार चाहती है कि देश का पानी देश के लोगों के काम आए।
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस फैसले से पाकिस्तान में बड़ा असर पड़ेगा, तो उन्होंने कहा कि भारत अपने हितों को ध्यान में रखकर फैसले ले रहा है। उनका कहना था कि देश के जिन इलाकों में पानी की जरूरत है, वहां पानी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि देश के संसाधनों का लाभ सबसे पहले देशवासियों को मिलना चाहिए।
सीआर पाटिल ने जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में कई नदियां प्रदूषण और उपेक्षा का शिकार हो गई थीं। गंगा समेत अनेक नदियों को साफ करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े स्तर पर अभियान चलाया है। नमामि गंगे जैसी योजनाओं के जरिए नदियों के संरक्षण और स्वच्छता पर लगातार काम किया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि जल संकट भविष्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है और इसके समाधान के लिए सरकार दीर्घकालिक योजनाओं पर काम कर रही है। उनका मानना है कि बेहतर जल प्रबंधन, जल संरक्षण और संसाधनों के प्रभावी उपयोग से देश के कई हिस्सों में पानी की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
हालांकि सिंधु नदी के पानी को पूरी तरह रोकने और उसे दूसरे क्षेत्रों में मोड़ने की प्रक्रिया तकनीकी, कानूनी और भौगोलिक चुनौतियों से जुड़ी हुई है, लेकिन सरकार का दावा है कि इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। आने वाले समय में इस योजना का असर भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।