गंगा दशहरा हिन्दू धर्म का एक अत्यंत पवित्र उत्सव है। प्रचलित विश्वास है कि इस शुभ दिन मां गंगा की पूजा और आराधना करने से पाप नष्ट होते हैं। मोक्ष प्राप्ति का मार्ग सुगम होता है। ज्योतिष के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन मां गंगा को विशेष भोग अर्पित करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। चूंकि यह पूजा गर्मियों में मनाई जाती है, इसलिए देवी गंगा को सामान्यतः ऐसे भोग अर्पित किए जाते हैं जो शरीर को ठंडक प्रदान करें। इस वर्ष गंगा दशहरा 25 मई, सोमवार को पड़ रहा है। इस विशेष दिन देवी गंगा की कृपा प्राप्त करने के लिए कौन-कौन से भोग अर्पित करना शुभ है ?
1. सत्तू
गंगा दशहरा पर देवी गंगा को सत्तू (सतुआ) अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्वार या चने की सत्तू में घी और चीनी या गुड़ मिलाकर छोटे-छोटे लड्डू बनाए जा सकते हैं और देवी को अर्पित किए जा सकते हैं। इसके बाद उस प्रसाद को वितरित करने की भी परंपरा है। गर्मियों के दिनों में सत्तू शरीर में ठंडक लाता है।
2. मौसमी फल
इसके अलावा गर्मी के मौसमी फल जैसे- तरबूज, खरबूजा और आम देवी गंगा के अत्यंत प्रिय हैं। विशेष रूप से खरबूजा अर्पित करने की प्राचीन परंपरा है। प्रचलित विश्वास है कि इन फलों को अर्पित करने से जीवन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
3. सफेद रंग की मिठाई
गंगा दशहरा पर सफेद रंग के मिठाई या भोग को भी विशेष महत्व दिया जाता है। सफेद रंग देवी गंगा को अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसलिए दूध, चावल और मखाना से बना खीर अर्पित करना शुभ होता है। इसके साथ ही काजू बर्फी, सफेद रसगुल्ले जैसी मिठाई भी भोग के रूप में चढ़ाई जा सकती है। ऐसा माना जाता है कि इस प्रकार का भोग परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ाता है।
4. मालपुआ
कई स्थानों पर गंगा दशहरा के विशेष पूजन में मालपुआ अर्पित करने की प्रथा भी है। शुद्ध घी में बनी मालपुआ देवी गंगा को अर्पित करने से जीवन के विभिन्न कष्ट दूर होते हैं ऐसा विश्वास है। इसके अलावा मिठाई और मक्खन भी देवी गंगा का अत्यंत प्रिय भोग है। इसे अर्पित करने से मानसिक शांति और प्रसन्नता का आशीर्वाद मिलता है ऐसा माना जाता है।
5. कौन सा नियम मानें ?
पूजा के समय एक विशेष नियम का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। धार्मिक मतानुसार, देवी गंगा का अवतरण दशमी तिथि में हुआ था। इसलिए गंगा पूजा में 10 संख्या का विशेष महत्व है। इसी कारण भोग अर्पण में भी 10 संख्या का उपयोग शुभ माना जाता है। जैसे—10 दीपक जलाना, 10 फल अर्पित करना, 10 मालपुएँ या 10 लड्डू अर्पित करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। पूजा के अंत में वह प्रसाद ब्राह्मणों या गरीब लोगों में वितरित कर दें। इसके बाद देवी गंगा का ध्यान करके अनजाने में हुई गलतियों और पापों के लिए क्षमा मांगने से शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है।